Kulgeet

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यह संस्कृत विद्यापीठ श्रद्धेय श्रीलालबहादुरशास्त्राी जी के द्वारा सरंक्षित है। विद्यापीठ द्वारा अपनी शैशवावस्था में अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन के सहयोग से विविध महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किये गये। इस संस्था ने संस्कृत विद्वत्सम्मेलनों एवं विभिन्न समितियों का संयोजन संस्कृत-ग्रन्थों के सम्पादन और मुद्रण की व्यवस्था तथा संस्कृत-भाषण-प्रतिस्पर्धा एवं कवि-गोष्ठियों के आयोजनों से लोक में पर्याप्त ख्याति अर्जित की है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मूर्धन्य राजनेता श्री नरहरि विष्णु गाडगिल एवं श्रीबलवन्त नागेश दातार ने विद्यापीठ के प्रवर्तन का पथ प्रशस्त किया। दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल डॉ. आदित्यनाथ झा आदि अधिकारियों ने इस विद्यापीठ को सरकारी अनुदान द्वारा समृद्ध किया। पण्डित-मण्डली से मण्डित डॉ. मण्डन मिश्र आदि विद्वज्जनों के समूह द्वारा इस विद्यापीठ का शैक्षणिक स्तर उन्नत किया गया। श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी तथा विभिन्न केन्द्रीय मंत्रियों ने इस विद्यापीठ का सम्पोषण किया। भारत सरकार द्वारा शास्त्री जी के स्मारक रूप में इसके अधिग्रहण करने की घोषणा कर विद्यापीठ का विकास किया। विभिन्न राजनेताओं ने इस विद्यापीठ के कार्यों का यशोगान करके इसे लोक में विशष रूप से प्रतिष्ठित किया। यह विद्यापीठ सभी छात्रों के शिक्षण और संस्कृत शिक्षकों के प्रशिक्षण में सजग है। विद्यापीठ ने अपने मार्ग में आने वाले सैकड़ों विघ्न-बाधाओं का निवारण साहस के साथ किया है। हमें हर्ष है कि इसने शैशवकाल में ही विश्व के कोने-कोने में अपनी कीर्ति पताका फहराई है। ऐसा यह विद्यापीठ श्री लाल बहादुर शास्त्री जी द्वारा संभव हुआ है।